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English Listening Practice (अंग्रेजी सुनना जरूरी है )

English Listening Practice

English listening is one of the 5 core skills one needs to practice every day: READ HERE.
So far, I’ve uploaded 2 videos on English Listening Practice. Here we go, one by one:

English Listening Practice Exercise # 1

Where am I from? I am from Dehradun. Dehradun is my hometown, the capital of Uttrakhand and the most populous city of the state. I am born and brought up there. My parents live there. It’s pretty obvious I love it the most; particularly when it comes to being at a place and feel at home. I am a banker and live away from my parents. Although I visit Dehradun quite often, generally once in month or so; yet I feel, it would have been better if I had been posted there permanently. Anyways, I am not too far either. It’s only 6-7 hours run if I travel by bus or train.

Talking about Dehradun as a city, I must say it’s one of the most beautiful cities in Uttrakhand. Though I’ve been to Haldwani, Nainital and Bhimtal as well, which are no doubt so beautiful places too in Uttrakhand, but it’s obvious that one loves the place to live in where one’s parents reside. Actually, my father was in Army, now he is retired; so I got opportunities to live at various places in Dehradun since childhood. We lived in Army quarters at Anarwala, Raiwala, Garhi cantt and then Clement town. Present location of my house is just a kilometer away from one of the most popular universities in Uttrakhand; you must have heard the name I guess, it’s Graphic Era University. So, that’s all about my hometown.

Now in Hindi…

मैं कहाँ से हूँ? मैं देहरादून से हूँ। देहरादून मेरा गृहनगर, उत्तराखंड की राजधानी और राज्य का सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। मैं वहाँ पैदा हुआ हूँ और वहीं मेरी परवरिश हुई  है । मेरे माता-पिता वहीं रहते हैं। जाहिर है, मुझे ये शहर सबसे ज्यादा पसन्द है ; खासकर तब जब कहीं रहने और घर जैसा महसूस करने की बात हो । मैं एक बैंकर हूँ और अपने माता-पिता से दूर रहता हूँ । हालाँकि, मैं देहरादून अक्सर आता जाता रहता हूँ, आम तौर पर महीने में एक बार; फिर भी मुझे लगता है, अगर मैं स्थायी रूप से वहीं होता तो बेहतर होता। वैसे, मैं बहुत दूर भी नहीं हूँ । यदि मैं बस या ट्रेन से यात्रा करता हूँ तो केवल 6-7 घंटे में ही पहुँच जाता हूँ ।

एक शहर के रूप में देहरादून उत्तराखंड के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक है। हालाँकि मैं हल्द्वानी, नैनीताल और भीमताल भी रहा हूँ, इसमें कोई शक नहीं कि ये भी उत्तराखंड में सबसे खूबसूरत जगहों में से हैं, लेकिन जाहिर है कि हर किसी को वो जगह सबसे ज्यादा पसंद होती है जहाँ उनके माता-पिता रहते हैं। दरअसल, मेरे पिताजी सेना में थे। अब वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं; इसलिए मुझे बचपन से देहरादून के विभिन्न स्थानों पर रहने का अवसर मिला । हम अनारवाला, रायवाला, गढ़ी कैंट और फिर क्लेमेंट टाउन में सेना के क्वार्टर्स में रहे । मैं वर्तमान में उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय विश्वविद्यालयों में से एक से केवल एक किलोमीटर की दूरी पर रहता हूँ ; आपने नाम तो सुना ही होगा, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय। तो, बस यही सब है मेरे गृहनगर के बारे में।

English Listening Practice Exercise 2

Today, let me tell you about one of my best friends, Vishal. Way back in the year 2006, when I had recently joined an International Call Center in Gurgaon; I happened to meet him there in the cafeteria. He was sitting next to me. I was having the food and he was, I guess, eating some snacks. He got a call; he picked up and started talking.  I could clearly hear his extraordinary voice and accent. “It’s American accent, I guess.”. I said this to another guy sitting adjacent on the other side; it wasn’t American though, which I discovered later after having a chat with him.

While listening to his amazing telephonic conversation, the words of one of my teachers reverberated loud in my ears, “Aditya, if you are the part a group of people, who are more skilled than you; you remain motivated to improve your skills too.”

I wished, he could somehow become my friend but I was unsure if he would even deem me worthy for it. Why was I feeling so inferior? It was just because of his lifestyle, his personality, his communication skills and a lot more. I knew if he became my friend, I would be able to improve my fluency and accent to a great extent. I was being selfish at that point of time, I know that; but if I had to grow in my life, if I had to fight and win over my adverse circumstances, if I had to become what I am now; I needed to be a little selfish too.
Guys, if your selfishness doesn’t hurt people, then there is nothing wrong with it, I guess.

Now in Hindi…

आज मैं आपको अपने एक सबसे अच्छे दोस्त विशाल के बारे में बताता हूँ। वर्ष 2006 में, जब मैंने हाल ही में गुड़गांव में एक अंतर्राष्ट्रीय कॉल सेंटर ज्वाइन किया था ; संयोगवश मैं कैफेटेरिया में उससे मिला। वह मेरे बगल में बैठा था। मैं खाना खा रहा था और शायद वो कुछ स्नैक्स खा रहा था। उसे एक फोन आया; उसने फोन पिक किया और बात करने लगा। मैं उनकी गजब की आवाज और उच्चारण को साफ साफ सुन पा रहा था। “मुझे लगता है, ये अमेरिकन एक्सेंट है।”, मैंने अपने दूसरी तरफ बैठे व्यक्ति से ये कहा; हालाँकि यह अमेरिकन एक्सेंट नहीं थी , जिसका मुझे बाद में उसके साथ बात करने के बाद पता चला।

उसकी कमाल की टेलीफोनिक बातचीत को सुनते हुए, मेरे एक शिक्षक के शब्द मेरे कानों में जोर से गूंज उठे, “आदित्य, अगर तुम ऐसे लोगों के समूह का हिस्सा हो, जो तुमसे ज्यादा कुशल हैं ; तो तुम अपने कौशल में सुधार करने के लिए हमेशा प्रेरित रहोगे। ”

मैं चाहता था कि वो किसी तरह मेरा दोस्त बन जाता पर मैं श्योर नहीं था कि वो मुझे अपने दोस्त होने के लायक भी समझेगा। मुझे इतनी हीन भावना क्यों महसूस हो रही थी? यह सिर्फ उसकी लाइफस्टाइल, उसके व्यक्तित्व, उसकी कम्यूनिकेशन स्किल्स आदि के कारण था। मुझे पता था कि अगर वो मेरा दोस्त बन गया, तो मैं अपनी फ्लूएन्सी व उच्चारण में काफी हद तक सुधार कर सकूंगा। मैं उस समय स्वार्थी हो रहा था, मैं जानता हूँ ; पर अगर मुझे अपने जीवन में आगे बढ़ना था, अगर मुझे अपनी प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़ना और जीतना था, अगर मुझे वो बनना था जो आज मैं हूँ ; तो मुझे थोड़ा स्वार्थी होने की भी जरूरत थी।
अगर आपका स्वार्थ लोगों को चोट नहीं पहुँचाता, तो इसमें कुछ गलत नहीं है।

To be continued…..

Hope you loved this article. Your love and support is my motivation. Thank you so much my dear students. – Aditya sir

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